Hit enter after type your search item

अंदरूनी बुखार के लक्षण

/
/
/
42 Views

जब किसी को ‘आंतरिक बुखार’ होता है तो वह बहुत गर्म महसूस कर सकता हैं, लेकिन फ़िर भी थर्मामीटर तापमान में वृद्धि नहीं दिखाता है।  सबसे आम बात यह है कि किसी व्यक्ति को एक सामान्य बुखार के समान लक्षण होते हैं, जैसे कि ठंड लगना और  ठंडा पसीना, लेकिन थर्मामीटर फिर भी 36 से 37 डिग्री सेल्सियस पर होता है जोकि बुखार का संकेत नहीं देता है।

 यद्यपि आप कह सकते हैं कि आपका शरीर बहुत गर्म महसूस करता है। ‘आंतरिक बुखार’ मौजूद है या  नहीं है, यह पता करने का एक लोकप्रिय तरीका है कि आपके पास सामान्य बुखार के समान लक्षण हैं, लेकिन बुखार थर्मामीटर पर नहीं है  पर हाथ की हथेली पर इसे महसूस किया जाता है, और यह एक थर्मामीटर द्वारा सत्यापित भी नहीं होता है।

बुखार के मुख्य लक्षण

 अंदरुनी बुखार के लक्षण निम्न होते हैं जोकि सामान्य बुखार में भी होते हैं:

  •  गर्मी लगना
  •  ठंडा पसीना आना
  •  दिन भर ठंड लगना
  •  सरदर्द होना
  •  थकान होना
  •  शक्ति महसूस न करना

 हालांकि, अंदरूनी बुखार के लक्षण में ये सभी मौजूद होते हैं, लेकिन तापमान में कोई वृद्धि नहीं होती है जिसे कि उसको मापा जा सके है।

 बुखार क्या संकेत कर सकता है?

 बुखार के माध्यम से शरीर एक प्रतिक्रिया देता है ताकि हानिकारक सूक्ष्मजीवों से लड़ने के लिए अपना तापमान बढ़ाया जा सके। बुखार वायरस, कवक, बैक्टीरिया या परजीवी के कारण संक्रमण होने के मामलों में एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है।  तो कह सकते हैं कि बुखार कोई बीमारी नहीं है, यह सिर्फ एक लक्षण है जो कई प्रकार के रोगों और संक्रमणों से जुड़ा होता है।

 बुखार केवल तभी हानिकारक है जब यह 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो जाता है यह ख़ासकर शिशुओं में और वयस्कों में दौरे का कारण बन सकता है।

 एक हल्के बुखार को 38 ° C तक माना जाता है, जिसे तापमान में वृद्धि, या कहें कि बुखार के रूप में जाना जाता है, और यह बहुत गंभीर नहीं है, केवल यह दर्शाता है कि आपको सतर्क रहने और ठंडा होने के लिए कपड़े कम पहनने की आवश्यकता है 36º C तापमान आपके शरीर का सामान्य तापमान होता है और जब तापमान 38.5 C से ऊपर होता है तो वह बुखार होता है जिसके लिए शरीर के तापमान को सामान्य करने के लिए बुखार कम करने वाली दवा, साथ ही अन्य प्राकृतिक तरीकों को आजमाने की ओर संकेत दे सकता है।

 शरीर के तापमान को नियंत्रित करने वाला ‘थर्मोस्टेट’ हाइपोथैलेमस है, जो किसी भी तरह के तापमान में होने वाले बदलाव के प्रति बहुत संवेदनशील है।  यह शरीर में अधिक गर्मी पैदा करने का कारण बन सकता है, जो कि त्वचा के माध्यम से पता चलता है कि  तापमान में वास्तविक वृद्धि हो रही है इसलिए थर्मामीटर इस तथ्य को बता पाता है।  इसलिए इससे यह पता चलता है कि ‘आंतरिक बुखार’ मौजूद नहीं है।

 ‘आंतरिक बुखार’ के मामले में क्या करें

 जब आपको लगता है कि आपको ‘आंतरिक बुखार’ है, तो आपको गर्म स्नान करना चाहिए और लेटकर आराम करना चाहिए।  अक्सर इस बुखार के कारण तनाव और चिंता होता है।

 बुखार कम करने वाली दवा, जैसे कि एसिटामिनोफेन या इबुप्रोफेन को लेने की सलाह केवल डाक्टरों की सलाह पर ही ले और जब थर्मामीटर कम से कम 38.5 ° C दिखाएं तभी ये दवाएं लें। अगर अंदरूनी बुखार’ है, और थर्मामीटर  तापमान को नहीं दिखाता है, तो बुखार से लड़ने के लिए कोई दवा नहीं लेनी चाहिए।  इसलिए, यदि ज़रूरी हो, तो आपको अपने  शरीर के तापमान को कम करने और मुश्किलों को कम करने के लिए गर्म पानी में स्नान करना चाहिए।

 यदि अंदरूनी बुखार के लक्षण बने रहते हैं, तो आपको बॉडी चेकअप के लिए अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए ताकि पता चल सके कि शरीर में क्या हो रहा है। ब्लड और पेशाब के टेस्ट के अलावा, आपका डॉक्टर छाती के एक्स-रे भी कराने को कह सकता है, क्योंकि हो सकता है कि फेफडों में किसी समस्या के कारण बुखार आ रहा हो

 ‘आंतरिक बुखार’ के संभावित कारण

 भावनात्मक कारण, जैसे कि तनाव या चिंता का होना, और महिलाओं में ओव्यूलेशन के समय अंदरूनी बुखार होने का मुख्य कारण हैं।  हालाँकि, आपको लग सकता है कि व्यायाम करने के बाद या किसी प्रकार की शारीरिक थकान के कारण आपको बुखार है, जैसे कि भारी बैग ले जाना या सीढ़ियों पर ऊपर चढ़ना।  इस स्थिति में, तापमान आमतौर पर कुछ मिनटों आराम करने के बाद सामान्य सा हो जाता है।

फ्लू की शुरुआत में, शरीर में अस्वस्थता, थकान और भारीपन महसूस करना आम बात है, और कभी-कभी लोग अंदरूनी बुखार भी महसूस हो सकता हैं। एक घरेलू उपाय यह है कि गर्म अदरक की चाय पीना आपको बेहतर महसूस करवाने का एक अच्छा तरीका हो सकता है।

 डॉक्टर के पास कब जाएं

 यह आशा की जाती है कि जब आप डाॅक्टर के पास जाए, सहायता लें, तो आपके पास ये सामान्य लक्षण होने चाहिए जैसे:

  •  छींक आना
  • खांसी;
  •  उल्टी, दस्त;
  •  मुँह में छाले;
  •  बहुत तेजी से तापमान 39º C से ऊपर हो जाता है;
  •  बेहोशी या ध्यान के समय में कमी;
  •  नाक, गुदा या योनि के माध्यम से रक्तस्राव।

ये सभी जानकारियां देना डाक्टर को देना जरूरी है ताकि इस जानकारी के साथ डॉक्टर को किसी बीमारी पर संदेह हो सकता है और यदि आवश्यक हो तो सबसे पहले वह टेस्ट करने को बोलेगा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This div height required for enabling the sticky sidebar