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सर्वाइकल के लक्षण

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सर्वाइकल एक ऐसी स्थिति है जो जिसमें रीढ़, डिस्क और लिंगामेंट के बिगड़ने कारण गर्दन में दर्द होता है।

 सर्वाइकल के कई अन्य नाम है जैसे गर्दन का गठिया, ऑस्टियोआर्थराइटिस इत्यादि हैं।

 सर्वाइकल स्पिन सात छोटी छोटी कशेरुकाओं (vertebrae) को को बताता है जो गर्दन को बनाने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। इसकी शुरूआत सिर की खोपड़ी (skull) से होती हैं। सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस में, कशेरुकाओं(vertebrae) के किनारों पर अक्सर हड्डी विकसित होती हैं जिसे ऑस्टियोफाइट्स कहा जाता है। धीरे धीरे यही डिस्क पतली हो जाती है। अपनी क्षमता ये धीरे धीरे खोने लगती है और इसकी वजह से लक्षणों का खतरा बढ़ जाता है।

 सूजे हुए गर्दन के जोड़ आस-पास की तंत्रिका के जड़ों या रीढ़ की हड्डी को दबा सकते हैं जिसके कारण हाथों में झुनझुनी या पिन और सुई चुभोने जैसा दर्द भी कभी-कभी अंगों में हो सकता है। कुछ लोगों को चलने में दिक्कत भी हो सकती है।

ज्यादातर लोग उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई परिवर्तनों का अनुभव करते हैं।  AAOS ने कहा कि 60 वर्ष से अधिक आयु के 85 प्रतिशत से अधिक लोग सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के शिकार बन जाते हैं।

अभ्यास या व्यायाम

  सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लक्षण का इलाज डॉक्टर के मार्गदर्शन में गर्दन के व्यायाम के माध्यम से किया जा सकता है। गर्दन के कुछ साधारण व्यायामों को अपनाकर व्यक्ति सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लक्षण को कम कर सकता है।

 गर्दन को स्ट्रेच करके

 1.अपने शरीर को सीधा रखें।

2.अपनी ठुड्डी को इस तरह से आगे की ओर धकेलें कि गले में खिंचाव आए।

3. गर्दन की मांसपेशियों को धीरे से बहुत हल्का सा तनाव दें।

 4.ऐसे ही 5 सेकंड के लिए होल्ड करें।

5. अपने सिर को उसकी पहले की स्थिति में लौटाएं।

6. अपनी ठुड्डी को ऊंचा रखते हुए अपने सिर को पीछे धकेलें, और 5 सेकंड के लिए वहीं रुकें।

 6. ऐसे ही 5 बार दोहराएं ।

 गर्दन को झुका कर

1.अपने सिर को आगे की ओर झुकाएं ताकि ठुड्डी छाती को छुए।

2.गर्दन की मांसपेशियों को धीरे धीरे और बहुत हल्के से तनाव दें।

3. इसे 5 सेकंड के लिए उसी स्थिति में होल्ड करें।

 4.सिर को पहली की स्थिति में लौटाएं।

5. इसे 5 बार दोहराएं।

गर्दन को अगल-बगल झुकाकर

1 कान के साथ साथ अपने सिर को किसी भी कंधे की ओर झुकाएं।  

2.गर्दन की मांसपेशियों को धीरे से तनाव दें।

3. इसे 5 सेकंड के लिए उसी स्थिति में होल्ड करें।

 4.अपने सिर को पहले की स्थिति में लौटाएं और दूसरे कंधे पर भी यही दोहराएं।

5. इसका 5 बार दोहराव करें।

 गर्दन मोड़ कर

 1.अपने सिर को एक तरफ मोड़ें जहाँ तक यह आरामदायक हो, अपनी ठुड्डी को एक स्तर की ऊँचाई पर रखें।

 2.5 सेकंड के लिए अपनी गर्दन की मांसपेशियों को बहुत ही हल्का तनाव दें।

3. सिर को पहले की स्थिति में लौटाएं।

4. ऐसा ही विपरीत दिशा में दोहराएं।

5. इस अभ्यास को गर्दन के दोनों तरफ 5 बार दोहराएं।

ये अभ्यास या व्यायाम सर्वाइकल की स्थिति के प्रभाव को कम करने और दर्द को भी कम करने में मदद कर सकते हैं।  हालांकि, इससे सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस का इलाज नहीं होता है।

 सर्वाइकल होने के कारण

 सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लक्षण लंबे समय तक डिजनरेशन और सर्वाइकल स्पाइन के टूट-फूट के कारण होता है।  पिछली गर्दन की चोट भी इस स्थिति को जन्म दे सकती है।

 कुछ लंबी अवधि की गतिविधियों से सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है, जैसे कि भारी भार उठाना, मार्शल आर्ट का अभ्यास करना, या एक कोरियोग्राफर या जिमनास्ट होने के कारण।

 कुछ शोधकर्ताओं का कहना है कि सर्वाइकल होने का आनुवंशिक कारण भी हो सकता है क्योंकि यह स्थिति कभी-कभी परिवारों से परिवारों में भी चलती है।

 यह आमतौर पर 40 साल की उम्र के बाद दिखना शुरू हो जाता है, और समय के साथ ही यह बढ़ता है। पुरुषों में यह महिलाओं से कम उम्र में ही हो जाता है।

 धूम्रपान से भी सर्वाइकल का खतरा बढ़ सकता है।

सर्वाइकल का इलाज

 सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस आमतौर पर बिना किसी लक्षण के होता है। जब सर्वाइकल के लक्षण होते हैं तो वे अक्सर उपचार के बिना ही ठीक हो जाते हैं। और अगर लक्षण होते हैं, तो सर्वाइकल का उपचार इसके प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है।

यदि व्यक्ति को गर्दन में ऐंठन है, जिससे गर्दन की मांसपेशियां अचानक से कस जाती हैं, तो मांसपेशियों को आराम देने वाली दवा डॉक्टर मरीज को दे सकते है। इसके  विकल्पों में साइक्लोबेनज़ाप्राइन और इसी तरह के मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाएं शामिल हैं।

एंटीडिप्रेसेंट, जैसे कि एमिट्रिप्टिलाइन, कभी-कभी लगातार हो रहे दर्द को दूर करने में मदद कर सकता है।  गैबापेंटिन भी इसके इलाज में एक और विकल्प है।

 गर्दन के दर्द में अगर एक स्टेरॉयड इंजेक्शन लगा दिया जाए तो इससे बहुत गंभीर दर्द में आराम मिल सकता है।

स्टेरॉयड इंजेक्शन के उदाहरणों में शामिल हैं:

  •  ट्रिगर-पॉइंट इंजेक्शन जो एक चिकित्सक ही लगा सकता है
  •   एक सर्वाइकल एपिड्यूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन (ESI), जिसे फ्लोरोस्कोपी के तहत एक्स-रे की मदद से लगाया जाता है

शल्य चिकित्सा(सर्जरी)

 कभी-कभी, दर्द और जकड़न के लक्षण बेहद अधिक हो जाए है और बढ़ते ही रहते हैं जिससे तंत्रिका संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

 सर्जरी भी एक विकल्प हो सकता है यदि व्यक्ति निम्नलिखित लक्षणों को अनुभव करता है:

  •  लगातार गर्दन का दर्द जो बांह तक पहुंच चुका है।
  •   मांसपेशियों में कमजोरी
  •  आंत्र में का नुकसान 

यदि एमआरआई की रिपोर्ट रीढ़ की हड्डी पर दबाव का संकेत देती हैं, जिसे मायलोपैथी के रूप में जाना जाता है, तो व्यक्ति को सर्जरी से लाभ हो सकता है।

 सर्जन कुछ ऑस्टियोफाइट्स या हड्डी के उभरे हुए टुकड़ों को हटा भी सकता है, और संभवतः रीढ़ की हड्डी से दबाव हटाने के लिए डिस्क के कुछ हिस्से को भी हटा सकता है।

 एक अन्य प्रकार की सर्जरी सर्वाइकल फ्यूजन है।  इससे जोड़ों और रीढ़ की हड्डी पर दबाव कम होगा।

सर्वाइकल के लक्षण

 सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस एक प्रकार का गठिया है और यह दर्द और जकड़न जैसे लक्षणों का कारण बनता है।

 ज्यादातर मामलों में, केवल गर्दन में दर्द, जकड़न और कभी-कभी सिरदर्द होता है।

 गर्दन का दर्द कंधों, बाहों और हाथों और खोपड़ी के आधार तक फैल सकता है।  सिर हिलाने से दर्द बढ़ सकता है सरदर्द सर्वाइकल के लक्षण में सामान्य माना जाता है।

 लंबे समय तक सक्रिय नहीं रहने के बाद गर्दन में अकड़न या जकड़न की समस्या अधिक हो जाती है, उदाहरण के लिए, सोने के बाद ये समस्या होती है।

 सिरदर्द सिर के पिछले हिस्से से शुरू होता है और फिर धीरे-धीरे पूरे सिर में फ़ैल जाता है। 

 सर्वाइकल के लक्षण में हाथ और पैर का कमजोर होना भी शामिल हैं, और किसी चीज की कमी हो सकती है।  कुछ लोगों को डिस्पैगिया हो सकता है, या निगलने में कठिनाई हो सकती है।

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